उसूल बदलने होंगे

चली थी ज़िंदगी जिन उसूलों पे अब तक,
और न जाने चलेगी ये कब तक ।

बदल गया ज़माना अब उसूल भी बदलने होंगे,
वर्ना खायेंगे खोखा, और रोते रहेंगे ।

आइना नया बनाना पड़ेगा,
नज़रों से सबकी छुपाना पड़ेगा ।

असलियत देखा दे जो इंसा की मुझको,
संभल जाऊंगा , बचा लूंगा खुदको ।

जियूँगा ज़िंदगी, शर्तों पे अपनी,
सुनूंगा सबकी, करूँगा बस दिलकी ।

अच्छा हुआ तो मिसाल बनूँगा,
बुरा हुआ तो किसे से न कहूँगा ।

छंट जायेंगे दोस्त, परिजन और कुछ चाहने वाले,
बच जायेंगे जो, वही होंगे साथ चलने वाले ।

बहुत कम भी हौ, तो भी गम ना करूँगा,
ख़ुशी से जियूँगा, कभी शिकवा ना करूँगा ॥

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/02/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/02/2016

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