मुरथल में नंगा नाच – शिशिर “मधुकर”

मेरे भारत के लोगों की किसने ये नाज़ुक हालत कर दी
छीना झपटी का रोग लगा और सीनों में नफरत भर दी
जिस दिन से आज़ाद हुए हम सबने सच से मुँह मोड़ा है
बस कुछ लोगों ने अपनी खातिर पूरे समाज को तोडा है
जाती धर्म में बाँट बाँट कर कहीं समरसता नहीं आती है
बँधी भुआरी ही तो आँगन का सारा कचरा संगवाती है
सब को सम शिक्षा तो दी ना इस आरक्षण का तंत्र दिया
भीड़ जोड़ बातें मनवाने का बस एक दूषित सा मन्त्र दिया
वंचित लोग कभी समाज में कोई व्याभिचार ना करते हैं
वो तो अपने अधिकारों की खातिर सच के संग में लड़ते हैं
फिर किन वंचित और पिछड़ों ने मुर्थल में नंगा नाच किया
माँ बेटियों की आबरू लूटी भारत के आँचल को तार किया
ऐसे लोगों को क्या कभी कोई जिम्मेदारी दी जा सकती है
जिनके दिल में नारी की खातिर हवस वहशियत बसती है
कैसा देश, इतिहास, संस्कृति हम तो अब केवल शर्मिन्दा हैं
बेमतलब घुट घुट जीते जाने को जाने क्यों कर के जिन्दा हैं

शिशिर “मधुकर”

14 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/02/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/02/2016
  3. Bimla Dhillon 27/02/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/02/2016
  5. Bimla Dhillon 27/02/2016
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/02/2016
  7. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/02/2016
  8. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/02/2016
  9. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/02/2016
  10. bhola shankar 27/02/2016
  11. sarvajit singh sarvajit singh 02/03/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/03/2016
  12. C.M. Sharma babucm 08/06/2016
  13. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/06/2016

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