तू भी आ जा होली में – शिशिर “मधुकर”

माघ चल दिया फाग आ गया तू भी आ जा होली में
तेरे बिन माधुर्य ना आए कोयल की रसमय बोली में.

रंग बिरंगे फूल खिल रहे और भँवरें भी गुंजन करते हैं
मन मयूर मस्ती में नाचे जब इन नैनों से नैना मिलते है
अलसाए दिन रात हुए और मादकता छाई है बोली में
सखियों संग आनंद ना आए अब तो आँख मिचोली में.

माघ चल दिया फाग आ गया तू भी आ जा होली में
तेरे बिन माधुर्य ना आए कोयल की रसमय बोली में.

रंग भरी पिचकारी जब तपते अंग पर जल बरसाती है
गोरी के हर रोम रोम में मीठी सी सिहरन भर जाती है
सतरंगी बौछारों में जब जिस्मों से जिस्म मिल जाते हैं
जोर जोर से धड़के नाज़ुक दिल पानी से भीगी चोली में.

माघ चल दिया फाग आ गया तू भी आ जा होली में
तेरे बिन माधुर्य ना आए कोयल की रसमय बोली में.

तुमको मन ही मन याद करके हमनें तो सर्दी काटी है
तन्हाई की ये सारी पीड़ा सखियों के साथ ना बाँटी हैं
खत में भी संदेश ना भेजा जो चैन चुराए तेरे दिल का
दर्द को मेरे पढ़ना होगा बस तुझको मेरी इस बोली में

माघ चल दिया फाग आ गया तू भी आ जा होली में
तेरे बिन माधुर्य ना आए कोयल की रसमय बोली में.

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/03/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/03/2016
  2. sarvajit singh sarvajit singh 02/03/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/03/2016
  4. योगेश कुमार 'पवित्रम' योगेश कुमार 'पवित्रम' 28/03/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/03/2016

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