* ग्रह नक्षत्र का चक्कर *

भागम भाग भरी है जिंदगी
जब से मैं जन्म लिया
तब से हमारे संग सभी रहें भाग ,
जब मैं प्रथम प्रकाश देखा
शनि का साढ़े साती था
और मैं तेतर
भादवा भी साथ-साथ ,
जन्म लेते ही मेरे मामा ने
थाली तोड़ी हांड़ी फोड़ी
उसी समय हल धड़ा दिया मेरे हाथ
सभी ने कहा यह राज दबाएगा
कुछ नहीं कमाएगा
परेशानी में जन्म लिया
परेशानी ही लाएगा ,
मामी ने कहा नहीं
यह है राजू राज लगाएगा
क्यू आप सभी हैं परेशान
यह सृष्टि है कर्म प्रधान
जो जैसा कर्म करे वैसा पाता
यह भी वैसा पाएगा ,
वहाँ से मुझे घर लाए
दादी गोद उठाई
नाम पर एतराज जताई
फलाने के लड़के का उपमा सुनाई
उसका कर्म कुण्डली बताई
और मेरा नाम बदलवाई ,
अब मैं बड़ा हो गया हूँ
अपने पैर पर खड़ा हो गया हूँ
कर्म प्रधान है यह सृष्टि
हमें हो रहा विश्वास
न कोई ग्रह न कोई नक्षत्र
नाम का उपमा
शनि का साढ़े साती
सब कहने की है बात
सभी का है काट ,
पर आज भी मैं रहा हूँ भाग
दिल से पूछा तो , अंदर से
आई आवाज
भागना तो आज जिन्दगी का नाम
रुकोगे तब जब थम जाएगी साँस ,
मेरे मित्रों मान जाओ
यह सच्ची बात है जान जाओ
कर्म प्रधान है यह सृष्टि
कर्म प्रधान हीं रह जाएगा
जो जैसा पेड़ लगाएगा
वैसा फल खाएगा
नाम उपमा ग्रह-नक्षत्र के
चक्कर में झूठा समय गवाएगा।