हाथ मलते रहे……

जिंदगी की राहो में ठोकरे खाते रहे, चलते रहे !
कदम – कदम पर गिरते रहे फिर सम्भलते रहे !!
दास्तान -ऐ- जिंदगी शाम की तरह ढलती गयी !
उम्र अपनी मजिल पा गयी हम खड़े हाथ मलते रहे !!

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D. K. Nivatiya.

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/02/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/02/2016
  2. Vijay yadav Vijay yadav 25/02/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/02/2016
  3. Ankita Anshu Ankita Anshu 25/02/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/02/2016
  4. sarvajit singh sarvajit singh 26/02/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 26/02/2016

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