तौहीन कर गया,,,,,,

हद को छोड़कर पलकों की दामन पे आ गिरा ,
तेरा इश्क़ मेरे सब्र की तौहीन कर गया ,,,
थी खामोश कब से ग़मों का समुन्दर लिए हुए,
मेरा आँसू इस समुन्दर को नमकीन कर गया ,
तेरा इश्क़ मेरे सब्र की तौहीन कर गया,,,,,,,,

है समां तेरे इश्क़ का मेरे रूबरू मेरे हमनशीं ,
तसव्वुर में खो गया मेरा दिल तेरे अब जानशीं,
तेरे प्यार का हर एक निशां ये समां गमगीन कर गया
तेरा इश्क़ मेरे सब्र की तौहीन कर गया,,,,,,,,,,,

ये उदासियाँ ,ये तन्हाईयाँ ,ये इश्क़ की हैँ निशानियाँ,
तू दूर है जब से सनम हैं दूर मुझसे मेरी परछाईयाँ,
क्यों दिल मेरा ये इश्क़ का ज़ुर्म संगीन कर गया ,
तेरा इश्क़ मेरे सब्र की तौहीन कर गया,,,,,,,,।।

सीमा “अपराजिता”

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/02/2016
    • सीमा वर्मा सीमा वर्मा 25/02/2016
  2. mani mani 18/07/2016
  3. C.M. Sharma babucm 18/07/2016

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