* सूत-पूत *

सूत जुड़ कपडा बने
पूत जुड़ वंश
एक तन ढके
दूजा ढके मन।

सूत विकाश का बने प्रतिक
पूत विकाश को रखे नित्य
सूत मौसम मार झेले
पूत झेले प्रीत।

सूत का अपना प्रकार पूत का अपना
हर का अपने आप से नाता है गहरा
कपडा पहन लोग इठलाते इतराते
वंश बढ़ा देख फूले न समाते।

सूत से बना कपडा पहन लोग
अपना मान प्रतिष्ठा दिखाए
पूत जो मानवता वंश का
मान प्रतिष्ठा बढ़ाए।

सूत के बनी रस्सी से
फांसी भी दिए जाते
कुछ ऐसे पूत हैं जो
मानवता वंश प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिलाते।

सूत जुड़ कपडा बने
पूत जुड़ वंश
एक तन ढके
दूजा ढके मन।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/02/2016
  2. नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 25/02/2016

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