||खतरे में हिंदी का अस्तित्व ||

“क्या मै कल लुप्त कहीं हो जाउंगी
या दफ़न किताबों में हो जाउंगी
देख शान अंग्रेजी का
हिंदी फिर आज शरमायी है ,
परिचालन देख तेजी से युवाओं में
आज गुहार एक लगायी है
मत समझो मुझको बेगाना
कह आज फिर अश्रु बहायी है,
क्यूँ मोहभंग हुआ है मुझसे
क्यूँ उपयोग में मेरे शरमाते हो
क्यूँ भागते हो मुझसे दूर तुम
क्यूँ उपहास मेरा बनाते हो ,
थी मै कभी आधारशिला
इस भारत की आज़ादी का
एक क्रांति की आग लगायी थी मैंने
अंग्रेजो की बरबादी का ,
बन मातृभाषा इस भारत की
नया गौरव इसे दिलाया था
दूर -दूर तक विदेशों में भी
इसको कीर्तिमान बनाया था ,
मत मुह मोड़ो ऐसे मुझसे तुम
मत अपनाने में मुझको शर्माओं
मत खिलवाड़ करो अस्तित्व से मेरे
और ना ही मुझको भरमाओं ||”

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/02/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/02/2016
  3. omendra.shukla omendra.shukla 25/02/2016

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