||टुटा दिल ||

“आज फिर से ये वक्त
कुछ बेरहम सा लगता है
क्यूँ बसंत का मौसम ये
पतझड़ सा मुझको लगता है ,

क्यूँ महफ़िलों में छाया है तन्हापन
क्यूँ संगीत बेसुरा लगता है
क्यूँ ये सावन की बारिश भी
कुछ सुखा- सुखा सा लगता है ,

क्यूँ ये सर्द हवाये अब
उष्ण सी प्रतीत होती है
क्यूँ ये प्यार की बातें अब
सीने में कंटक सी चुभती है ,

वीरानी सी हो जाती है दुनिया
जब ये दिल टूट जाता है
हर पल होता है दर्द का आलम
जब दिल ये तनहा रह जाता है ||”

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/02/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/02/2016
  3. Vijay yadav Vijay yadav 24/02/2016
  4. omendra.shukla omendra.shukla 25/02/2016

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