भूल ना जाना इस सहादत को…………..

ऐ मेरे वतन ,
निभा दिया वो हर फ़र्ज़ ,
जिसके लिए मैं आया था ,
छोड़ दिया उस माँ का दामन ,
जिसकी मैं दुनिया था ,
वो पिता जिसका एक ही सहारा था ,
मेरे जिगरा दी यारी ,अधूरी रह गयी मेरे बिन ,
मेरा सनम जिसका इंतज़ार कभी खत्म ना होने वाला था ,
आँखे बंद करके बहुत सुकून मिला ,
जब लिपटा था , तिरंगे की उस शान से ,
पर जब माँ सीने पर सर रख्कर रो रही थी ,
बहुत बेबस हो गया था ,
कैसे समजाता माँ , तेरा लाल तो अपने वतन पर शहीद हो गया ,
लेकिन सदैव ज़िंदा रहेगा वो ,अमर ज्योति बनकर …….

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/02/2016

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