बेटियाँ बोझ नहीं

बेटियाँ माँ-बाप पर बोझ नहीं होती, बोझ तो वो समाज के लिए हो जाती हैं..
वो तो इक दस्तूर बना दिया समाज ने,
वरना इक माँ का दिल कभी इज़ाज़त न देता जीवन भर
अपने कलेजे के टुकड़े को खुद से अलग करने के लिए ….
एक बाप कभी जाने न देता अपनी सोन चिरैया को
अपना आँगन छोड़ दूसरों का आँगन सजाने के लिए….

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 24/02/2016
    • Ankita Anshu Ankita Anshu 25/02/2016

Leave a Reply