करुण पुकार

-:करुण पुकार:-
हे हंसवाहिनी ! वीणापाणि !
तम को वेध प्रकाश भरो।
अहंकार के वशीभूत ,
मानव का उद्धार करो।
दिग्भ्रमित हुए हैं धरा-पुत्र,
कैसे अभिमान करेंगे।
रणक्षेत्र बना है ज्ञानालय,
कलुषित इतिहास रचेंगे।
हे वाग्देवी ! हे वीणापाणि !
ज्ञान सुधा संचार करो।
क्षुद्र ज्ञान के वशीभूत,
मानव का उद्धार करो।
अश्रुविगलित माँ की आँखें,
कैसे आहलाद भरेंगे।
जब छद्मवेश से ऊपर उठ,
माटी के लाल बनेंगे।
हे माँ शारदे ! वीणापाणि !
प्रेम सुधा संचार करो।
विषाक्त भाव के वशीभूत ,
मानव का उद्धार करो।
डॅा राखी रानी,
देवघर महाविद्यालय, देवघर

5 Comments

  1. omendra.shukla omendra.shukla 23/02/2016
  2. Vijay yadav Vijay yadav 23/02/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/02/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/02/2016
  5. BOBBY AGRAWAL 29/02/2016

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