अक्द तेरी जबां से उठता है.

जो जहाँ भी जहाँ से उठता है .
तो ज़नाजा वहाँ से उठता है .

बात पूरी नहीं करी तो फिर.
अक्द तेरी जबां से उठता है.

आब ही तो है जान मोती की .
भाव उसका वहाँ से उठता है.

कश्तियाँ डूब डूब जाती हैं.
यह बवंडर कहाँ से उठता है .

बस्तियां खाक ही न हो जाये.
ये धुँआ सा कहाँ से उठता है.

आग से खेलता भला क्यां है.
ये पतंगा कहाँ से उठता है.

इल्म तो ‘हिन्दुस्तान’ से आया .
शोर सारे जहाँ से उठता है.
गंगा धर शर्मा ‘हिंदुस्तान’

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/02/2016

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