“पल भर मोहब्बत की भी आस न रखे कोई”

मेरी सांसों से चले एसी साँस न रखे कोई ।
मैं खुद प्यासा हूँ , मेरी प्यास न रखे कोई ।
दाँव पे रख दी हैं जिंदगी भर की मोहब्बत ,
पल भर मोहब्बत की भी आस न रखे कोई ।

माना के बुरा हूँ पर ये फरियाद न करे कोई ।
बस ईतनी सजा दो के मुझे याद न करे कोई ।
ईश्क की आग मे जल के खाख हो चुका हूँ मैं ,
मुझे अब ईस्से भी ज्यादा बरबाद न करे कोई ।

-एझाझ अहमद

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/02/2016
  2. एझाझ अहमद Azaz Umerji 23/02/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/02/2016

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