जब दर्द से दिल भर आता है

जब दर्द से दिल भर आता है,
मैं कागज़-कलम उठाता हूँ,
तेरी याद सुर सुनाती है,
मैं ताल मिलाता जाता हूँ।

इस उम्मीद-ए-दुनिया में मैं,
उम्मीद बचाता जाता हूँ,
ये सूरज छिपता है फिर भी,
कविताएँ रचता जाता हूँ,
नफ़रत-ए-शोर इस दुनिया का,
गूंज रहा है राहों में,
फिर भी यार-ए-दिल देखो मैं,
गुनगुनाता जाता हूँ।

मैं तारा बन जाऊं ऐसा,
जो जगमगादे दुनिया को,
आँखों में सपने लेकर के,
गाथाएं गाता जाता हूँ,
ये राह अंधेरी है और,
साथी सहमे-सहमे से हैं,
हाथों में हाथ भरकर के,
मैं झिलमिलाता जाता हूँ।

तुम साथ रहो तब तक मेरे,
जब तक मौत ना आ जाये,
जब आजाये यमदूत यहां,
मौसम का रंग बदल जाये,
तुम रोओ बैठकर पास मेरे,
मेरे हाथ ज़मीं पर फैले हों,
उस दिव्य दृश्य में मगन गगन,
सात रंग का हो जाये,
साथ तुम्हारे यहीं सखी,
जीवन मैं जीना चाहता हूँ,
इस चार रंग की चार पहर में,
सार प्यार का गाता हूँ।

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