“पत्थर दील पे मेरे अब कोई असर न होगी”

पत्थर दील पे मेरे अब कोई असर न होगी ।
मर भी गये तो अब तुमको खबर न होगी ।
खो जायेंगे उस अँधेरी तनहा रातों मे ,
के गर सूरज भी निकले तो सहर न होगी ।
तुम्हे देखता रहे चाहे सारा जहाँ मगर ,
निगाहें मोहब्बत की तुम पर नजर न होगी ।
चाहोगे मुझे गर ख्वाब मे भी बुलाना ,
तो आँखे तुम्हारी बन्द रात भर न होगी ।
ढूंढ़ते रहोगे चेनो राहत रात दिन ,
सुकुन से जिंदगी फिर भी बसर न होगी ।
लाख कोशिसे करोगे गर मर जाने की तुम ,
तुम्हारी जिंदगी फिर भी मुख़्तसर न होगी ।
-एझाझ अहमद

7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/02/2016
  2. एझाझ अहमद Azaz Umerji 22/02/2016
  3. Inder Bhole Nath Inder Bhole Nath 22/02/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/02/2016
  5. एझाझ अहमद Azaz Umerji 22/02/2016
  6. omendra.shukla omendra.shukla 23/02/2016
  7. mangala mangala 01/03/2016

Leave a Reply