इन साँसो की बेचैनी से..

इन साँसो की बेचैनी से, इन आँखों की बेचैनी से,
समझो ना दिल का हाल ज़रा, ये कैसा माया जाल ज़रा।
जब से तुमको है निकट पाया, ईक सिहरन सी इस तन में है,
यूँ बेहोशी का आलम है, ईक बेचैनी सी मन हैं ।

हाथों से कर दो स्पर्श ज़रा, तन में जीवन संचार तो हो,
जड़ हूँ, चेतन बन खिल जाऊं, ये साँसो का श्रृंगार तो हो,
खो जाने दो मुझको खुद में, ग़ुम हो जाओ तुम भी मुझमे,
मैं निराधार सा जीवित हूँ, इस जीवन का आधार तो हो।

दो तन को इक हो जाने दो, सब वहम कहीं खो जाने दो,
साँसें तुम लो और छोड़ू मैं, ऐसे खुद में रम जाने दो,
आँखे मेरी जग तु देखें , धड़कन मेरी मन तेरा हो,
आरम्भ हो यूँ फिर अंत न हो, ये समय यहीं थम जाने दो।

इन साँसो की बेचैनी से, इन आँखों की बेचैनी से,
समझो ना दिल का हाल ज़रा, ये कैसा माया जाल ज़रा।

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/02/2016
    • Vijay yadav Vijay yadav 22/02/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/02/2016
    • Vijay yadav Vijay yadav 22/02/2016

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