खुशबु कहाँ से लाऊँ – शिशिर “मधुकर”

जब दिल में बसे लोग दिल को दुखाते हैं
हसरतों के हसीन ख्वाब सारे टूट जाते हैं
अपनी तड़प की हमनें जब भी दी दुहाई
तेरी सदा कभी मुझ तक लौट के ना आई.
उजड़े हुए चमन में मैं खुशबु कहाँ से लाऊँ
बंज़र हुई धरती पर अब कैसे गुल उगाऊँ
फूलों को भी खिलने को नरम धूप चाहिए
प्रीत निभाने को भी श्रद्धा का रूप चाहिए.

शिशिर “मधुकर”

9 Comments

  1. davendra87 davendra87 21/02/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/02/2016
  2. Vijay yadav Vijay yadav 21/02/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/02/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/02/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/02/2016
  5. omendra.shukla omendra.shukla 23/02/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/02/2016
  6. C.M. Sharma C.m sharma(babbu) 10/09/2016

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