हृदय की गाथा …..

निकले थे लेकर अरमानो का पिटारा जीवन के सफर पे
खट्टे मीठे अनुभवों ने खुशियो की झोली खाली कर दी !
भटकते रहे दर – बदर होकर वक़्त के रथ पे सवार
खो गयी मंजिल तो कश्ती लहरो के हवाले कर दी !
जब मिला न कोई दर्द बाटने वाला हमसफ़र हमे राह में
लेकर सहारा तिनको का जिंदगी तूफ़ानो के हवाले कर दी !
हर एक रंज -ओ-गम को रखते रहे समेत कर पहलू में
हृदय की गाथा आंसुओ की स्याही से कागजो पे लिख दी !!

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०___डी. के. निवातियां___०

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/02/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/02/2016
  2. anuj tiwari 26/02/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/02/2016
  3. Bimla Dhillon 27/02/2016
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/02/2016

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