आया बसंत की बहार

मौसम की है पुहार
आया बसंत की बहार
फूल खिले है कितने मनोरम
देखो इस बागो में
झूम उठी है सारा जहाँ
पेड़ो में लदे है कितने प्यारे
कितनी प्यारी मयूर सारे
आम की डाली पर
बोल पपीहे,कोयल गाये
कूह-कूह कर सरगम सुनाये
मीठी-मीठी सी धूप हैं
कितनी प्यारी रूप हैं
मौसम की है पुहार
आया बसंत की बहार
खेत फसलों से ऐसे सजे हैं
जैसे नई दुल्हन की तरह
सरसों के ये पिले फूल
कितने सुंदर लगते हैं
फसलो को देखकर
किसान भी मुस्काएँ
बसंत की चल रही है हवाएँ
गेहूँ के खेतो में
कंघी कर रही है हवाएँ
रंग-बिरंगी कितनी
तितली उड़-उड़ जाये
मोर नाचे ताता-थैया
और किया मैं बताऊ भईया
मौसम की है पुहार
आया बसंत की बहार………..
@मु.जुबेर हुसैन

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/02/2016

Leave a Reply