मई 24 – तंज

मैं रोया हूँ सहमकर ,
कि वो न रोये .
दिल के गुबार में ,
है एक तंज ,
जो —
आँखों को ,
खुलकर बरसने नहीं देता .

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/02/2016

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