||ना पैदा होगा अब कोई गद्दार ||

“होंगे पैदा जितने गद्दार
हर एक को चुन चुन मारेंगे
काटेंगे हर गर्दन उसकी
जो भारत को दुत्कारेंगे ,

हर घर में मातम छाएगा
जिस घर से अफजल आएगा
वो कोखे होंगी सुनी हरदम
जिस कोख में अफजल आएगा ,

आतंक नहीं फिर तांडव होगा
हर जर्रा जर्रा थर्रायेगा
पापी रूह उस अफजल की
सदियों तक शोक मनाएगा ,

आने से पहले भारत में उसकी
हर रूह काँप सी जाएगी
जीने से पहले जीवन अपना
वो मृत्यु दिवस मनाएगी ,

धारण करने को दूजा शरीर पुनः
हर रूह उसकी थर्रायेगी
ना जाना अब भारत मुझको
कुछ ऐसा कह कत्राएगी ,

नाम गद्दारों का रखने से पहले
हर जुबान वो घबरायेगी
पैदा करने से पहले गद्दारों को
हर बार सहम सी जाएगी || “

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/02/2016
  2. omendra.shukla omendra.shukla 17/02/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/02/2016
  4. omendra.shukla omendra.shukla 18/02/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/02/2016

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