उस क्षण धरा पर

जिस क्षण मासूम भोर ,
चिड़ियों की चहचहाहट से हठात ,
खोल देती है अपनी अलसाई आँखें ,
और आँगन के कोने में ,
तुलसी के बिरवे के पास,
छेड़ देती तानपूरे पर भैरवी की सरगम ,
उस क्षण धरा पर उम्मीदें जाग जाती हैं !!
जिस क्षण भरी दुपहरी ,
सिहर जाती है कोयल की कूक से ,
और बौराई घूमती है अमराई में ,
जब कोई प्यासा खेतिहर ,
कुएं के शीतल जल से प्यास बुझा ,
आ बैठता है अमराई की छाँह में ,
उस क्षण धरा पर आशाएं जगमगाती हैं !!
जिस क्षण सलोनी संध्या ,
रूपसी ,सुन्दर ,सांवली सी ,
जाती है गांव की पगडण्डी पर
और कोई नटखट कान्हा ,
गोधूलि की उस बेला में ,
छेड़ देता है कोई मीठी धुन ,
उस क्षण धरा पर कलियाँ खिलखिलाती हैं !!
जिस क्षण नटखट रजनी ,
ओढ़ के सितारों भरा आँचल,
ले के जुगनुओं की टोली ,
पुरवैया की मस्ती में ,
भोले मासूम बालकों की बस्ती में ,
छेड़ देती है राग यमन ,
उस क्षण धरा पर चांदनी मुस्कुराती है !!

दीपिका शर्मा

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/02/2016
    • Dr Deepika Sharma Dr Deepika Sharma 19/02/2016

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