* आँखें *

आँखें चहरे की शान
आँखें दिल की मुस्कान
आँखें इनायत हैं जीवन का
आँखें तो हैं वरदान।

आँखों से झलकती है , ‘आदमियत’
कौन कैसा है करती यह पहचान है
बिना बोले सब कहती यह
खोलती दिल की राज है।

किसी की झील सी आँखें
किसी की निल सी आँखें
आँखें होती हैं सागर से भी गहरा
इसके पार कोई न उतरा।

आँखों से छलकती है
स्नेह और प्यार
मिटाती है यह दुरी
बढाती है ऐतवार।

आँखें न होती तो
आती न क्रांति
इसके बैगर
बेरंग यह संसार।