* मानते हैं इस बात को *

अगर आप हैं हिंदुस्तानी
पढ़ी होगी रामचरित मानस
या सुनी होगी उसकी दोहा ,
छंद और कहानी,
बात-बात में लोग कहते हैं –
“कर्म प्रधान विश्व करी रखा
जो जस करनी तासु फल चखा ”
फिर क्यू भूल जाते हैं इस बात को
“ऐसा समय भी आएगा
हंस चुगेगा दाना , कौवा मोती खाएगा। ”
इसका ऐसा प्रभाव होगा
हाथों हाथ परिणाम मिलेगा
रिश्ते-नाते सब भूलेंगे
काम तृष्णा में लिप्त होंगे ,
सभी को धर्म कानून का ज्ञान होगा
इसका व्यावसाय खूब फले-फूलेगा
इसका उल्टा परिणाम होगा
मानते हैं इस बात को।

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