* जब कोई बोलता है *

जब कोई बोलता है
दिल का राज खोलता है ,
कोई झूठ बोलता है
कोई सच बोलता है ,
कोई सोच समझ कर बोलता है
कोई सूझ -बुझ के साथ बोलता है ,
कोई बस यु हीं बोलता है
बोलने से उसका न है कोई नाता ,
बस यु ही वह बड़बड़ाता
नहीं उसका कोई पैगाम ,
जब मैंने उस से पूछा
तुम क्या बोलते हो और क्यों बोलते हो ,
तुम्हारा क्या है पैग़ाम
तुम्हारा क्या है पहचान ,
बहुतों ने इस के बल पर
बनाई अपनी पहचान और स्थान ,
हर किसी का कुछ न कुछ
होता है दर्शन
होता है ज्ञान होता है विचार ,
वह ऐसे चुप हो जाए
जैसे वह है अनबोलता के सामान ,
जब कोई बोलता है
दिल का राज खोलता है।

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