||नामर्दो का देश ||

“क्यूँ छाती चौड़ी करते हो
क्यूँ वीरता का दम्भ भरते हो
गद्दार हुए है लोग तुम्हारे
फिर भी ताव मुछो पे देते हो,

बेच खा रहे नेता देश को
फिर भी क्यूँ तुम सोये हो
पाकिस्तान की जयकारों में
क्यूँ हिंदुस्तान को खोये हो ,

संविधान हुआ है नामर्द तुम्हारा
या खुद नामर्द हुए हो तुम
निपट ना सकते घर के गद्दारों से
और पाकिस्तान से जंग करते हो तुम ,

रखवाली करता हो गद्दारो की
जिस देश का अँधा कानून यहाँ
नामर्द होते है वहाँ लोग सभी
पीके देशद्रोह का घूंट जीते जहाँ,

नाम मिट्टी क्यूँ करते हो
शिवाजी और राणाप्रताप का
क्यूँ खुद को उनका वंशज कहते हो
देके साथ तुम गद्दारो का ,

वो लहू नहीं वो पानी है
जो देश के काम ना आये
नहीं भरी वो जवानी है
जो देशहित से घबराये ,

सहिष्णुता के धीरज ने तुम्हारे
आज दिल्ली को लूटा है
गर सोये रह गए कुछ देर और
कन्याकुमारी फिर पीछे छूटा है ,

हिजड़ो के संग फिर तुम पीटो ताली
औकात इतनी रह जाएगी तुम्हारी
नाको और कानों में होगी बाली
बन जाएगी मुजरा पहचान तुम्हारी ,

हो मर्द अगर तुम वास्तव में
कन्याकुमारी का क्यूँ इंतजार तुम्हे है
उखाड़ फेको गर्दन उनकी
क्यूँ गद्दारो से भाईचारे की पड़ी तुम्हे है ||”

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/02/2016
  2. omendra.shukla omendra.shukla 16/02/2016
  3. निसर्ग भट्ट 12/03/2016
    • omendra.shukla omendra.shukla 13/03/2016

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