* अपना हारा *

अपना हारा मेहरी का मारा
ज्यादातर लोग छुपाते हैं ,
मगर आज हम आप को
राज की बात सुनाते हैं ,
आप सम्भल जाए
इसलिए बताते हैं ,
प्रशासन की मिली भगत से
गरीब बेरोजगारों को
चुना कैसे लगाते हैं।
झूठी नियुक्ति निकाले ऐ
झूठा आवेदन मंगाते हैं ,
सरकारी विभाग से मिलता-जुलता नाम रख
विज्ञापन में बड़े-बड़े वादे फरमाते हैं ,
अज्ञानी लोगों को बहला-फुसला ऐ ,
अंत में विभिन्न शुल्क के नाम पर
२५-५० हजार रुपया भी मांगते हैं।
सीधा-साधा बेचारा गरीबी का मारा
गहना जमीन घर द्वार बेच
लेना चाहता इसका सहारा ,
यहाँ भी वह हार जाता
उसकी नईया(नाव) नहीं पहुँचती किनारा।
उसकी शिकायत कोई सुनता नहीं
उसके दुःख को कोई गुणता नहीं ,
उपड से मजाक बनाते हैं ,
शायद इसीलिए
अपना हारा मेहरी का मारा
ज्यादातर लोग छुपाते हैं।

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