“मेरी क़लम भाग-55″डॉ. मोबीन ख़ान

माँ ने अपना फ़र्ज़ अदा किया,
पर वो अपना फ़र्ज़ निभाना भूल गए!

लगे दुनिया में नफ़रत फ़ैलाने,
मोहब्बत फैलाना भूल गए!!

क्या गुज़रती होगी इस ज़मीं पर,
उसकी लाज़ बचाना भूल गए!

ऐ ज़मीं माफ़ करदे, वो नादाँ हैं,
अपना आँचल दे, वो मुस्कुराना भूल गए!!

माँ ने अपना फ़र्ज़ अदा किया,
पर वो अपना फ़र्ज़ निभाना भूल गए!

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