बसंत

कण कण में नव चेतना है ,
कली कली मुस्काई है ,
ये किस प्रिय के आगमन से ,
वसुंधरा इतराई है !
बयार फागुनी हो चली ,
अमराई बौराई है ,
ये किस प्रिय के आगमन से ,
वसुंधरा इतराई है !
दिवस बासंती हो चले ,
कोकिला फिर गाई है ,
ये किस प्रिय के आगमन से ,
वसुंधरा इतराई है !
क्यारी क्यारी फूल खिल गए ,
सरसों खेतों में लहराई है ,
ये किस प्रिय के आगमन से ,
वसुंधरा इतराई है !
पिचकारी की तैयारी है ,
टेसू ने आग लगाई है ,
ये किस प्रिय के आगमन से ,
वसुंधरा इतराई है !!

दीपिका शर्मा

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/02/2016
  2. omendra.shukla omendra.shukla 15/02/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/02/2016
  4. Dr Deepika Sharma Dr Deepika Sharma 19/02/2016

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