कर्म के पथ पर चलता जा

कर्म के पथ पर चलता जा
कर्म के पथ पर चलता जा, तु धर्म के पथ पर चलता जा
जीवन का तु आनंद उठा खुशियों की महफ़िल बुनता जा
सत्यकर्म के पथ पर चलता जा………
सच्चाइयों से नाता ना तोड़,बुराइयों के साथ कभी ना जा
तु कर्म के पथ पर चलता जा……….
यह जीवन है मन मस्त पवन,दुखों की आंधी आयेगी
दर्द भी तुम्हे सताएगी…….
लेकिन साथी तु ना घवरा,बस कर्म तु अपना करता जा
उनको भी कभी ना तु भुला जिनके एहसान तले है दवा
अपना फर्ज निभाता जा,तु कर्म के पथ पर चलता जा
जीवन में मिलेंगे दर्द कई तु उन पर मरहम मलता जा
बस कर्म के पथ पर चलता जा………..
मंजिल के रस्ते पर बस मंजिल मंजिल करता जा
तु क्रम के पथ पर चलता जा…….
जब साथ छोड़ जाती है दुनियां………
तब कर्म ही साथ निभाता है,सत्कर्म ही हाथ बढाता है
इस बात को भुल जाती है दुनियां लेकिन साथी तु कभी ना भुला
बस कर्म के पथ पर चलता जा………
सफलता का द्वार तेरे लिय है खुला
मंजिल निहारे तेरा रास्ता, तु अपनी मेहनत करता जा

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