ऐसी बात

मन में मेरे तुम रहते हो ,
नज़रों को तुम ही दिखते हो .
ऐसी बात कहैं अब किससे ,
मेरे हो मेरे लगते हो !

सर्द सुबह की ताज़ी किरणें,
जैसे तुम आकर कहते हो .
मिलने की है बेला प्रियतम ,
यह दूरी कैसे सहते हो !

चंचल चितवन पर खोया मैं ,
दिल ही दिल मैं बहते हो ,
ऐसी बात कहैं अब किससे ,
मेरे हो मेरे लगते हो !

फूल तुम्हारे आगे फीके ,
सारे रंग तुम्हीं भरते हो .
ऐसी बात कहैं अब किससे ,
मेरे हो मेरे लगते हो !

सात सुरों से सिंचित बोली ,
जैसे गीत तुम्हीं लिखते हो .
ऐसी बात कहैं अब किससे ,
मेरे हो मेरे लगते हो !

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/02/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/02/2016

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