* रिश्ते -नाते *

रिश्ते-नाते इस जगत का आधार है
बिना इसके सुना यह संसार है।
किसी का खून का रिश्ता
किसी का मन का रिश्ता
किसी का मुख का रिश्ता
सारी ख़ुशी ,उल्लास ,सहयोग
मिलता इसी रिश्ते नाते के बाजार में।
जिसके रिश्ते में बसा प्रेम है ,
उसके लिए यह जीवन स्वर्ग के सामान है।
जिस रिश्ते में त्याग और प्रेम नहीं ,
वह बालू के भीत के सामान है।
जैसा आधार होगा वैसा निर्माण होगा
आधार पर ही टिका यह ब्रम्हाण्ड है।
ब्रह्म्भ ज्ञानी ,साधु-सन्यासी या हो
सृष्टि -निर्मात ,भाग्यविधाता
माता-पिता या हो अधिष्ठाता।
सभी का एक दूसरे से रिश्ता नाता
फिर क्यू है अलगाव और कटुता।
रिश्ते नाते इस जगत का आधार है
बिना इसके सुना यह संसार है।

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/02/2016
    • नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 14/02/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/02/2016
    • नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 16/02/2016

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