* किसी पर विश्वास नहीं *

अब यहाँ किसी का किसी पर विश्वास नहीं,
न वफा है न इनायत है
बस सभी का सभी से शिकायत है
लोग खुद ही खुद से खफा हैं
दूसरे को कहते वह बेवफ़ा है।

अब न वो बच्चें रहें
अब न वो बूढ़े रहें
किस को कौन अपना पूर्वज कहें
यह भी समझ के पड़े।

न रिश्ते में प्रेम रहा
न नाते में वो मिठास रही
सात जीवन की अब बात छोड़िए
अधि जीवन भी साथ रह ले
बहुतों की इतनी भी औकात नहीं।

अब यहाँ लोग एक दूसरे पर दोष मढ़ते हैं
अधिकार ढूंढते कर्तव्य भूलते हैं ,
आम जनता की बात छोड़िए
शासक प्रशासक सरकार
सभी सिर्फ अपनी सोचते हैं।
अब यहाँ किसी का किसी पर विश्वास नहीं।

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 14/02/2016
  2. नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 14/02/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/02/2016
    • नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 16/02/2016

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