||देशद्रोह कानून की उपज ||

“फिर शर्म से सर झुक आया है
आज पुनः आँखे रोयी है
देख दानवों का गुणगान
कर्णों ने भी सुध खोयी है ,

पूजे जाते थे देव जहा पे
आज दानवो की महिमा गायी जाती है
होती थी जहा देशभक्ति की बातें
आज देशद्रोह वहीँ दिखाई देती है ,

लहुँ से सींचा जिस देश को वीरों ने
दिया विद्वत्ता से जगतगुरु का सम्मान
हुयी है खंडित आज अखंडता इसकी
किया है दानवों ने इसका अपमान ,

एक जानवर जो जंगल में होता है
वह जंगल की रक्षा को तत्पर होता है
फिर क्यूँ इंसान बना जानवर से बदतर
क्यूँ अपनी ही मातृभूमि को गाली देता है,

पाढ़ पढ़ाया संसार को सहिष्णुता का जिसने
आज वही असहिंष्णु बताया जाता है
निजी स्वार्थो के चलते इसे
उपहास का पात्र बनाया जाता है ,

तुम गाली दो या देशद्रोह करो
ना कानून कोई रोक पायेगा तुमको
जो होंगे सच्चे देशभक्त यहाँ
बेच कानून खायेगा उनको || “

3 Comments

  1. laxman 13/02/2016
  2. Bimla Dhillon 14/02/2016
  3. omendra.shukla omendra.shukla 15/02/2016

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