*ठग*

फिर रहाहै मेरे देश मे ठगीया मेरे देश को कोई ठग लेगा ।

बनां फिरे बहूरूपिया वेशभूषा अपनी बदल लेगा ।

छल कपट और बेईमानी से विश्वासघात कर लेगा ।
आया है राक्षस लंका छोङ कर वेष वभिषण का कर लेगा ।
फिर रहाहै देश …….

या तो जायेगा राम मन्दिर मैं वेष भगवा कर लेगा ।
या तो जायेगा मस्जिद में अलादीन बनकर, नग्मा कलाम भी पढ लेगा ।
फिर रहाहै देश

बन बेठेगा वो अहिंसा का पुजारी गांधी टोपी सिर पर रख लेगा ।
राम नाम को छोङकर कलह आतंक कर देगा ।
फिर रहाहै देश

बेच रहा है वो पान मदिरा मद का प्याला भी पी लेगा ।
सो रहा है बिच रास्ते पर नाटक शराबी वाला कर लेगा ।
फिर रहाहै देश
का तो लगायेगा विदुर की निती या निती चाणक्य की कर लेगा ।
चाल चलागा सुकूनी की वो फिर से मेरे देश में महाभारत कर देगा ।
फिर रहाहै देश

बन बेठेगा वो माँ मदर टेरेसा वेष भारत माता का कर लेगा ।
बजायेगा वो डुगडुगी आगे , देश की जनता को पिछे कर लेगा ।
फिर रहाहै देश

लक्ष्मण कहे देशवासियों से बहूरूपिया भेष अपना कर लेगा ।
अग्रेज अपनी कूटनीति से फिर देश को गुलाम कर लेगा ।
फिर रहाहै देश मे ठगीया मेरे देश को कोई ठग लेगा ।
7734809671
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