बनङो

भारत माता की देख आख्या मे आँसू माँ आज मैं बनङो स्यों बणस्यों ।
लै हाथों मे तलवार बाध केसरीया साफो जिया लङे दो शेर शेर लङ ज्यों लङ स्यों ।माँ आज मैं बनङो स्यों बणस्यों ।

जोश है जवानी है जवानी मै मन तलवारा स्यों बहलास्यों ।
जित कर जंग आऊँगा घर मैं महक ऊठेगी कण कण स्यों ।

माँ आज मैं बनङो

मार दिये मेरे भाई बहन हमारे बदळो बैरा स्यों ले स्यों ।
जिया लङ दो नाग! नाग लङे ज्यों लङ स्यों ।

माँ आज मैं बनङो

रोज करते दुश्मन गोली बारी हम पर मैं बादल बण गरजस्यों ।
तोप चलेगी हमारी उन पर माँ माँ मै तोपारो गोलों बणस्यों ।
माँ आज मैं बनङो

करूंगा मैं घाव उनके इतने उन घाव पर नमक छिङकस्यों ।
बन जाऊँगा पत्थर ज्वाला आग ऊठेगी कण कण स्यों ।
माँ आज मैं बनङो
बहेगी खून की नदियाँ मैं गोरी की माँग खून स्यों भर स्यों ।
मैं चलूंगा आगे पिछे उन को करस्यों
माँ आज बिन्द स्यों बणस्यों ।
माँ आज मै बनङो स्यों बणस्यों लेखक लक्ष्मण सिंह राजपूरोहित

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