हिन्द के वीर -II

हिन्द धरा है परम वीरों की
करूँ मैं नमन बारम्बार
वतन के हित में जो बलि हुए
वो भारत के हैं अमूल्य उपहार

हैं वो बड़े भाग्यशाली
जो वतन के लिए जान गवांते
नहीं मिलता ऐसा नसीब सबको
सही में वो माटी का क़र्ज़ चुकाते

है इतिहास सदा ही साक्षी
कि जीत हमारे कदम चूमती है
दुश्मन थर थर कांपते हैं
नज़र वीरों की जिधर घूमती है

हिन्द इतिहास भरा है वीरों से
माटी इसकी चांदी -सोना है
बहुत हुआ अब और नहीं सहेंगे
अब कोई वीर हमें नहीं खोना है

कफ़न तिरंगे का जो
शान से ओढ़ा करते हैं
फिर दुश्मन की तो बात ही क्या
मौत से भी नहीं डरा करते हैं

ऐसे वीर योद्धा सदा ही
इतिहास में अमर हो जाया करते हैं
उनकी वीरता की गाथा, इंसान तो क्या
देवता भी गाया करते हैं

उनकी पावन चिता की राख को
आओ निज शीश धरे हम
उनके बलिदान को याद कर
अश्रूं संग नयन भरे हम

बह चली अब हर हिंदुस्तानी में
वीरता की रसधार है
ऐ खुदा ! अगले जन्म हमें भी सैनिक कीजो
ये अब हर दिल की वीर पुकार हैं

हितेश कुमार शर्मा

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/02/2016

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