(गजराज सरकार) संवाद

एक दिन सभी पशु पक्षियों ने एक सभा बूलवाई नहीं चल रहा देश का राज इन्सानों से ऐसी अपनी मन्शा जताई ।

रोज हो रहे देश में घोटाले कत्ले आम कोन करेंगा भरपाई ॥

वृद्धावस्था में बैठे गरूङजी बोले , कौआ बैठा देश का राज खोले ।चिङिया ने पिछे से अवाज लगाई।
राज पाट उसके हाथों मे दे दो बाबा, जो खाये खून पसीने की कमाई ।

इतने मे एक सिंह गरज कर बोला क्या मेरी बात आपको समझ में नहीं आई ।
बैठे रहो सिंहराज। बिच में बोल पङै गजराज, बहूत दिनों किया वन में राज पेट की आग अभी तक बूझ नहीं पाई ॥

गिरगिट अपना रंग बदले , बंदर करें बँटवारा, वन मंत्रालय मूझको दे दो ऐसी अपनी अपनी निती चलाईं ।
गृह मंत्रालय बिल्ली को दे दो , अपनी अपनी बात बारी बारी से समझाई॥

इतने में आ गये हंसराज, अब सरेगा सबका काज , सभा में कानाफूसी हो गई ।
है लोकतंत्र का राज। बहुमत मिलेगा वो करेगा राज नब्ज सबकी ढिल्ली हो गई ॥

सभी पदों का करों बँटवारा , नहीं हो इसमें कोई हत्यारा , सबने एक साथ अवाज लगाई ।
भाईचारे और विश्वास से सभी ने एक ऐसी सरकार बनाई ॥

प्रधानमन्त्री बन गये गजराज, जयकारे जयधोष के नारे लागे , गजराज को लगे भूख ज्यादा मन ही मन रोवन लागे ।
बंट गये सारे मंत्रालय खून के आँसू पिवण लागै, गृह मंत्रालय से एक चिंटी आई बातचीत बहूत बङी सूझबूझ। से गजराज को समझाई ॥

इस देश में पाप पुण्य धर्म बहूत है भाई , धर्मनिर्पेक्ष देश हमारा बस्ते है हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई ।
कुछेक तो मेहनत का खाऔ, कुछ भोग लगे देवताऔं को उनका भाई ।
देश का हिसाब। रहेगा बराबर सबको हिसाब दे पायेगें पाई पाई। ।
देखो इन्सानों एक छोटे से जीव की सूझबूझ कितनी काम आई॥

रक्षा मंत्रालय बाज को आया .उसने एक ऐसी सेना बनाई।
सिंह को किया सेना में भर्ती कौवे को दी चतुराई ।

दूसरे देश से मच्छर तक ना घूसे , ऐसी एक टूकङी बनाई ।
गधे से मरवाई लात. आतंकी की बत्ती सी तुङवाई ।

देखो इन्सानो गजराज ने कैसी सरकार चलाई ॥

क्रमस

लेखक लक्ष्मण सिंह राज पूरोहित 7734809671

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