“”साहसी परिंदा -हनुमनथप्पा “”

सियाचन हिमस्खलन में मोटी बर्फ की परतों ने उस परिंदे को ढँक दिया ,
खाना-पानी बिन छः दिनों तक अंदर ही अंदर उसने साँस लिया|
हारी नहीं थी हिम्मत उसने , जब तक साँसों का साथ था,
जूझ रहा था मौत से,फिर भी चेहरे पर भय का सिकन न था |
नियति के खेल के आगे परिंदा ज़िन्दगी की जंग से तो हार गया,
वतन का फौजी वतन का सपूत वो परिंदा वतन का आखिरी उड़ान भर गया ,
पर हमेशा के लिए अपने वतन से नाता जोड़ कर चला गया…
और साथ में हम सबके दिल में अपनी बहादुरी का झंडा गाड़ गया |
शब्द नहीं है मेरे पास जो उस परिंदे के साहस को बयाँ कर पाएं ,
जाते जाते परिंदे ने सीख दिया,
फौजी वो है जो हर आंधी – तूफ़ान से भी लड़ जाएं
हनुमनथप्पा के बहादुरी को सलाम…..
परिंदे के बहादुर दिल को सलाम …
वीर -जवान को भावभीनी श्रद्धांजलि ……

3 Comments

  1. Sampa 12/02/2016
  2. omendra.shukla omendra.shukla 12/02/2016
  3. Anuj Tiwari 20/02/2016

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