||सोने की चिड़िया | हाइकू ||

“देश मेरा ये
थी सोने कि चिड़िया
आज है कहा |

थे वीर यहाँ
शास्त्रो के ज्ञानी खूब
जगतगुरु |

बदल गया
सहसा सब कुछ
ना अब कुछ |

क्या बदलेंगे
अब दिन फिर से
करे संकल्प |

मिले सम्मान
पूर्ववत इसको
जीवनोद्देश्य ||”

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