* व्यथित हृदय *

व्यथित हृदय मेरा
किस का करू पुकार ,
सोचा घर सुधारूंगा
समाज सुधारूंगा
करूंगा राष्ट निर्माण ,
कीचड़ में कमल खिलता है
कीड़े-मकोड़े कुंम्भी पलता है ,
हृदय सोचा इस में
रंग-बिरंगी फूल खिलाऊंगा
इन्हें राष्ट निर्माण में लगाऊंगा
पर ऐ बदलने को नहीं हो रहें तैयार।
इन्हें अपने त्याग पर बड़ा गर्व है ,
व्यक्ति विशेष के चर्चा में ऐ समय बिताए
बालू से तेल चुआए ,
किसी तरह जीवन बीत जाए
इस में क्या हर्ज है ,
व्यथित हृदय मेरा
किस का करू पुकार।

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