==* अभी बाकी है *==

क्या हुवा गर टूट गया बिखरना तेरा बाकी है
डालीसे थोडा दूर भले खुशबु अभी बाकी है

महकने दे औरोको तेरे नामसे चोटही खानी है
थक जाये गर अभीसे ऐसे जिंदगानी बाकी है

दो अनजान लोगोको तेरी चमक मिलायेगी
मदतसे तेरी पगले दिल और धड़कने बाकी है

छोड़ न फर्ज तू ऐसे लिख्खे तेरे इस तक़दीर का
देख मेरे दोस्त तेरा मुरझाना अभीभी बाकी है
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✒ शशिकांत शांडिले, नागपूर
भ्रमणध्वनी – ९९७५९९५४५०
Abhi Baki Hai

2 Comments

  1. omendra.shukla omendra.shukla 11/02/2016
  2. शशिकांत शांडिले SD 01/03/2016

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