* श्मशान घाट में जलेबी *

* श्मशान घाट में जलेबी *

यहाँ न कोई मेला था ,
न किसी से किसी का झमेला था ,
कुछ समय पहले लोग
जहाँ वह रहता था ,
वहाँ लोग रो-रो कर एक दूसरे से ,
कुछ न कुछ उसके विषय में कहता था।
उसे उठा हरे खाट पर लिटा ,
उसे श्मशान घाट में ले आये
उसे नहाया फिर चिता सजाए ,
रो-रो परिजन उस में अग्नि लगाए ,
कुछ लोग नहाए कुछ जल छिट
स्वच्छ और शुद्ध होने का ढोंग रचाए।
श्मशान घाट में लोग जलेबी खाए ,
हाय यह रीत किस ने बनाया ,
कुछ पल पहले रोयें ,
फिर घाट में ही मिठाई खाए ,
पुनः घर वापिस आ
कर्म के नाम पर ढोंग में
ब्यस्त हो जाये।

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/02/2016
  2. नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 10/02/2016
  3. laxman 10/02/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/02/2016
  5. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 10/02/2016
  6. नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 10/02/2016
  7. omendra.shukla omendra.shukla 11/02/2016
    • नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 11/02/2016

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