” दर्द- ए- दिल “

कहाँ खोया है साथी तू ……
की तुझे कुछ सुनाई नहीं देता !!

साँसे चल दी मुझे छोड़कर …..
और तुझे कुछ दिखाई नहीं देता !!

आज जख्म खुद चलकर जुबान पर आ गए ….
पर जाने क्यों मेरा किस्सा किसी को सुनाई नहीं देता !!

मेरे बाद भी मेरी यादें जवाब तो लेंगी तुझ से ……..
ये वो सवाल होंगे जिसका कोई जवाब सुझाई नहीं देगा !!

ये पल हमेशा याद रहेंगे तुझे दर्द बनकर ……….
जो तेरे वक़्त को भी जल्दी गुजरने नहीं देंगे !!

सब के साथ तूने भी साथ छोड़ दिया मेरा……….
जो जख्म दिया तूने क्या वो तुझे दिखाई नहीं देता !!

क्या चाहा था और तूने क्या कर दिया……….
क्या तुझे मेरा ” हाल- ए- दिल ” सुनाई नहीं देता !!

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 10/02/2016
    • nirmala84 10/02/2016
  2. aishwar sunsaan shayar 12/02/2016

Leave a Reply