मनमीत – शिशिर “मधुकर”

जब मनमीत मिले ना कोई किससे बात करें मन की
कोई तो होगा पास है जिसके कुंजी मेरी उलझन की
जो भी मिला हाथ वो छूटा जाने हर पत्ता और बूटा
जन्मों संग रहने का जुमला अब तो लगता है झूठा
हम सब रिश्तों के जाल में उलझे डर डर के जीते हैं
नकली हँसी हँसके जीवन में जहर के प्याले पीते हैं
जो डर जाते हैं जीवन में बस छोटी-छोटी बातों से
वो कैसे जूझेंगे हँसकर दुःख की सब काली रातों से
जो काँटों की चोट से डरकर गुलशन में ना जाएगा
आखिर वो ताजे गुलाब के फिर हार कहाँ से पाएगा .

शिशिर “मधुकर”

15 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/02/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/02/2016
  3. Meena Bhardwaj Meena bhardwaj 09/02/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/02/2016
  5. sushil sushil 09/02/2016
  6. Bimla Dhillon 09/02/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/02/2016
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/02/2016
  8. YUDHI 10/02/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/02/2016
  9. KETKI SHARMA 12/02/2016
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/02/2016
      • Ketki sharma 12/02/2016
        • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/02/2016
  10. KETKI SHARMA 13/02/2016

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