तेरी याद

न जागा हुआ हु न सोया हुआ हुँ,
मैं तो किसी की यादों में खोया हुआ हुँ,
दिल बारबार ये कहता है,
क्यु !आख़ीर तू इतना सहता है,
दिल पे चोट लगे तो सहना नहीं है आसान,
जाके कह दे उसे तु नहीं है भगवान,
यह वह घाव है जो मिटायें नहीं मीटता।
अदृश्य सा लगे सबको पर ज़ख़्म अदंर ही रहता,
क्यूँ न तू इतना ही रहम करदे , इस ज़ख़्म को खुद ही आके भर दे!
तब सायद इस दिल को चैन मीलें , मै कुछ देर तो सो पाऊँ ,
तेरे छुने से सायद मैं कूछ और दिन जी जाऊँ ।

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 09/02/2016
    • Sampa 10/02/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 09/02/2016
    • Sampa 10/02/2016
  3. omendra.shukla omendra.shukla 11/02/2016
    • Sampa 12/02/2016

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