“क्यूँ बहके है आज अरमान फिर से”

“क्यूँ बहके है आज अरमान फिर से
क्यों आँखे नम हो आयी है
पिया मिलन को क्यूँ तड़पा दिल
क्यूँ बहारे फिर खिल आयी है ,

वो यादे जो रूठी रूठी सी थी
क्यों आज फिर अंगड़ाई ली है
वीरान पड़ा था गुलशन जो
उनमे सहसा क्यूँ कली खिली है ,

वो सुहाने किस्से चाहत के
वो आँख से बहता यादों का पानी
हर लम्हा,हर पल था तेरा
था कहता जो तेरी प्रेम कहानी ,

क्यूँ उम्मीदे सजी है आँखों में
क्यूँ दिल फिर प्यार में पागल है
चाहे हर पल,हर लम्हा तुझको
क्यूँ वफाओं का तेरे कायल है ||”

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/02/2016
  2. omendra.shukla omendra.shukla 08/02/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/02/2016
  4. omendra.shukla omendra.shukla 08/02/2016

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