चलते-फिरते

इमली और इश्क़ की तासीर एक है ,
खटाई जितनी ज्यादा , तलब उतना ज्यादा………..

——-

मेरे इश्क की गहराई तू क्या नापेगा ,
कदम रखा जोसमंदर में तो फिर किनारा न मिलेगा…………

——-

Leave a Reply