आगे जाने कि जिद

किस्मत कि रेखाएँ को बदलने कि जिद रही है ,
पुराने उसूलों को तोड़ने की जिद रही है।

डूबती नैया को पार करने की जिद रही है ,
बादलों की उफनती लहरों को मोड़ने की जिद रही है ।

पर्वतों की ऊचीं चोटियों को छूने की जिद रही है,
रेत में पानी की सरोवर को ढूढ़ने की जिद रही है ।

अनंत नभ में जाने की जिद रही है ,
हवाओं के ऊपर दौड़ने की जिद रही है ।

चट्टानों की बुनियाद हिलाने की जिद रही है ,
अँधेरी गुफाओं में दिया जलाने की जिद रही है ।

दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने की जिद रही है ,
अपनी टूट चुकी आशाओं को भी हक़ीक़त में बदलने की जिद रही है ।

क्या करूँ क्योंकि मुझे हमेशा से ही आगे जाने की जिद रही है ।।

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/02/2016
    • swaraj swaraj 21/02/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/02/2016

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